Monday, November 19, 2018

केसरी को हटाने की साज़िश सोनिया नहीं, प्रणब के घर रची गई थी:

सीताराम केसरी को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के 20 साल बाद अचानक इस बारे में कहा और लिखा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासमंद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "देश को पता है. सीताराम केसरी, दलित, पीड़ित, शोषित समाज से आए हुए व्यक्ति को पार्टी के अध्यक्ष पद से कैसे हटाया गया. कैसे बाथरूम में बंद कर दिया गया था. कैसे दरवाज़े से हटा कर, उठा कर फ़ुटपाथ पर फेंक दिया गया था. और मैडम सोनिया जी को बैठा दिया गया था. ये इतिहास हिंदुस्तान भली-भांति जानता है. उनको मजबूरी में बनाया था, उसको भी वो दो साल झेल नहीं पाए."

इन तथ्यों को जांचने के लिए और सबसे पुरानी पार्टी में उस वक्त चल रही हलचल को समझने के लिए हमें दोबारा इस मामले को याद करना होगा.

दरअसल, केसरी दलित थे ही नहीं और ना ही वो उस वक्त पार्टी के भीतर बेहद लोकप्रिय थे जब 14 मार्च 1998 में असंवैधानिक तख्तापलट की साजिश रची गई.

जितेंद्र प्रसाद, के करुणाकरन, शरद पवार, अर्जुन सिंह और कांग्रेस वर्किंग समिति के लगभग सभी सदस्य केसरी से निजात पाना चाहते थे और उन्हें हटाने में इन सभी की भागीदारी रही.

हालांकि ये भी सच है कि केसरी और उनके समर्थकों ने सोनिया को पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने से रोकने की हर तरह की कोशिश की थी.

केसरी के एक करीबी ने एक प्रतिष्ठित अख़बार के कॉलम में लिखा था कि सोनिया को इस तरह की ओछी राजनीति करने की बजाय इटली वापस लौट जाना चाहिए और एक अच्छी नानी मां की भूमिका निभानी चाहिए.

नेताओं ने नहीं अपनाया
सितंबर 1996 से मार्च 1998 तक पार्टी अध्यक्ष रहे केसरी के साथ कई समस्याएं थीं. दक्षिण और उत्तर-पूर्व के नेताओं को उनसे बातचीत करने में समस्या पेश आती थी क्योंकि वो अंग्रेज़ी नहीं जानते थे. उत्तर भारत के कांग्रेस के उच्च जाति के कई नेताओं ने उन्हें अपना नेता माना ही नहीं, क्योंकि केसरी पिछड़ी जाति के थे.

केसरी भी कांग्रेस के उत्तर भारत के ब्राह्मण और ठाकुरों को पसंद नहीं करते थे. ये बात भी जगज़ाहिर थी.

इसके अलावा केसरी लालू प्रसाद यादव, कांशी राम और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं के साथ महागठबंधन करना चाहते थे, जबकि कांग्रेस उस वक्त भी ख़ुद को पूरे देश का नेतृत्व करने वाली पार्टी मानती थी और गठबंधन में उसकी ख़ास रुचि नहीं थी.

लोकसभा चुनाव हारने के बाद अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे ऊंची जाति के कई कांग्रेसी नेताओं को केसरी के विचार और हतोत्साहित कर रहे थे.

No comments:

Post a Comment

هل هناك شيء خاص يتعلق باليابان؟

ثم هناك رفض اليابان الالتفات إلى نصيحة منظمة الصحة العالمية بذت الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع المتحدة، هدد الرئيس الأمريكي دونالد ترا...